एक अचरच जिसने सुरेश का जीवन बदल

एक अचरज जेने सुरेस को जीवन बदळी लाख्यो

एक नगर माय सुरेस नामको एक मनख थो जेकी घराळी घणी बेमार रेती थी । एक दन उके दवाखाना माय बताड़वा सरु इन्दोर लइजइरियो थो तो उको पड़ोसी उके मिळ्यो जेको नाम जॉन थो

जगदीश – अरे सुरेस भैया आज सवेरे – सवेरे दोइजणा कय्याड़ी जइरिया हो ?

सुरेस – कंई बतउं दादा म्हारी बइरा के नरादन से छाती माय दुखे अने खाणो-पीणो बी कम करी लाख्यो, हूं सोचीरियो के कइंका अच्छा दवाखाना माय बताड़ी दूं

जगदीश – हां क्योनी आजकाल तो नरा बड़ा-बड़ा दवाखाना खुलिग्या अने उणका माय असा साधन अइग्या के मनख का भितरे कंई बेमारी हे उके बी बताड़ी लाखे जिकासे उको इलाज करणो सबगो हुइग्यो हे ।

सुरेस .- तम ठीक कइरिया हो दादा ।

जगदीश – पइसा-कोड़ी की जरुवत होय तो म्हार से कीजे

सुरेस – नी नी अबी तो म्हारा कने हे अगर कमी हुइ तो हूं लइ लूंवां ।

जगदीश – पड़ोसीज पड़ोसी का काम आय हे म्हार से निस्चित हुइके कइदीजो

सुरेस - हां हां क्योनी दादा ।

(जगदीश ने अपणी बाट ली अने इ दोइ जणा बस स्टेन्ड आड़ी चल्या ग्या जां से उणके इन्दोर की बस जाणो थो बइरा जेको नाम लता थो उकी हालत ठीक नी थी वा करांजी री थी ।)

लता – म्हारेs s झट कइंकाs अस्पताळ माय लइsचलो म्हाs s रेs s घणी तकलीs sफ हुइरी हे ।

सुरेस – हां हां (आटो वाळा आड़ी देखिके चिल्लायो) ए रिक्साssss

रिक्‍सावाळा ने कने अइके क्यो – हां साब कां चलणो हे ।

सुरेस - हमारे चोइथराम अस्पताल चलणो हे कंई लोगा ।

रिक्सावाळो – साब पचास रुप्या ।

सुरेस – इ तो जादा हे

रिक्सावाळो – असो करो साब तम तो मीटर से किरायो दइदीजो ।

सुरेस – ठीक हे आव चलां ( रिक्‍सा माय बठिने चोइथराम अस्‍पताळ आड़ी चली पड़्या )

बस-बस यांज अस्‍पताळ का फाटक पेज उतारी दे हम चल्या जावांगा । सुरेस ने क्यो,

अच्‍छा साब रिक्सावाळा ने क्यो अने रिक्‍सो थोबी लाख्यो उने मीटर देखिके क्यो साब पेंताळीस रुप्या हुइग्या ।

सुरेस ने क्यो – यो सो रुप्या को नोट ले म्‍हारा कने खुल्‍ला हयनी ।

रिक्सावाळो – लो साब इ पचपन रुप्या ।

धीरे धीरे वी दोइ डाक्‍तर का कमरा आड़ी जावा लाग्या वां घणी भीड़ लागी थी सुरेस ने उने वाडबॉय से क्यो या चिट्ठी भितरे पोंचाड़ी दिजो ।

(थोड़िक देर बाद) लता जी कुण हे ?

(वी झट उठिने डाक्‍तर कने भितरे ग्या) हां कंई होयो ? डाकत्तर ने पुछ्‌यो ।

लता – म्हारी छाती माय घणो दरद हुइरियो हे । (डाकतर ने जांच करता होया क्यो) अच्‍छा - अच्‍छा कितरा दन से असो हुइरियो हे

नरादन से लता ने क्यो

डाकतर - हूं…. सोनो ग्राफी करवानी पड़ेगा । सामने का कमरा माय जाव वां हुइ जायगा । अने रिपोट लइके म्‍हारे बताड़ो ।

सुरेस – जी साब । लता आड़ी देखिके चलो ।

(सोनो ग्राफी करावा का थोड़िक देर बाद सुरेस ने उकी घराळी से क्यो ) तू यांज बेंच पे बठ हूं डाकतर साब के या रिपोट बताड़ी के अबी अउं । ( सुरेस डाकतर का कमरा आड़ी चली पड़्यो )

(वां पोंचवा पे) डाकतर साब अइजउं सुरेस ने क्यो । हां अइजाव हुइग्यी सोनो ग्राफी ? डाकतर ने पुछ्‌यो ।

सुरेस - जी हुइग्यी या लो रिपोट

रिपोट देखिके डाकतर को मुण्डा उदास हुइग्यो उने क्यो – भई सुरेस बात घणी गम्भीर हे अच्छो होयो तम अपणी बइरा के यां नी लाया ।

कंई हुइग्यो डाकतर साब – सुरेस ने घबरई के पुछ्‌यो ।

सुणी सकोगा – डाकतर साब ने क्यो ।

सुरेस केवा लाग्यो, “तम बताड़ो तो सरी ।“

भई तमारी बइरा के भयानक बेमारी हे तमारी बइरा से जीवा की जादा उम्मेद मती राखजो । डाकतर ने बड़ा गम्भीर पणा से क्यो ।

यूं कंई बोलीरिया हो डाकतर साब सुदी सुदी बात करो । सुरेस ने घबरइके क्यो ।

सुदी बात या हे के तमारी बइरा के केंसर हे उ बी आखरी मोका पे जादा से जादा तीन या छे मइना की म्हेमान हे । डाकतर साब ने सांची बात कइदी ।

कंई ( अचरज से उकी आंख फाटी की फाटीज रइगी ) डाकतर साब कसेज करिके उके बचइलो तमारो म्हारपे घणो एसान रेगा ।

डाकतर – अबे तो इसवर का भरोसे हे उज कंई करी सकेगा । एक काम करो तम उके मुम्मई टाटा अस्पताळ लई जाव अने जांच करइलो

सुरेस रोवा लाग्यो रोता-रोताज उने क्यो ठीक हे डाकतर साब हूं कालज लइके चल्यो जउंवां ।

एक- दो दन बाद वी मुम्मई सरु रवाना होया । अने टाटा मेमोरियल अस्पताल माय जइके केंसर का डाकतर से मिळ्या अने इन्दोर का डाकतर की रिपोट बताड़ी उनी रिपोट के देखिके

डाकतर ने क्यो - भई बात तो गम्भीर हे जांच करिके उने बी वाज बात की जो इन्दोर का डाकतर ने की थी ।

अबे सुरेस सरु कइंको रास्तो नी बच्यो उ अपणी घराळी के लइके पाछो देवास अइग्यो अने या सोचिके के दो-चार मइना तो जियेगा देवास का सरकारी अस्पताळ माय भरती करवई लाखी ।

एक दन उ वां का पादरी कने ग्यो

अने केवा लाग्यो - पादरी साब म्हारी बइरा अबे दो-चार मइना की म्हेमान हे क्योंके डाकतरहुंण ने जुवाब दइद्‌यो हे (असो होयो के एक सांजे पादरी साब उका सरु परमेसर से पराथना करवा सरु ग्या जदे उणने उके देखी तो सुरेस से केवा लाग्या – सुरेस भई तमारी बइरा अबी नी मरेगा ।

या कंई बात करीरिया पादरी साब डाकतरहुंण की रिपोट म्हारा कने पड़ी हे ।

पादरी साब – ठीक हे उणने उणको काम कर्‌यो अबे हम अपणो काम करां चलो परमेसर से पराथना करां उना परमेसर से जो सब कंई करी सकतो हे । आज से दो हज्जार साल पेलां उने अपणा बेटा इसु मसीह के मोकल्यो उने नरा अचरज का काम कर्‌या अने आज बी करीरियो हे । अने तमारी घराळी के बी अच्छी करी लाखेगा । ( वी अने देवास का सगळा मसीह समाज का लोगहुंण पराथना करवा लाग्या । अने अद्‍भुत घटना घटी आज नो साल हुइग्या हे इना चमत्‍कार के देखिके उका आदमी ने परभु सरु काम करनो सुरु करिद्‌यो हे अबे उ बी पराथना की सेवा में लागिग्यो जां बी लोग बेमार रे उ उणका सरु पराथना करे हे परमेसर को धन्यबाद होय )